शीर्षक : " प्यार का ज़ख्म " ✍️ कवियत्री : अवनी शिवांग दवे (शिवे स्वरी), वडोदरा.
इश्क़ में हमने ये कया नजारा देख लिया।
अब तो जीना एक ज़ख्म बन गया।
जाने क्यों ? हमने चाहा आपको इतना ।
की जीवन मेरा एक सितम बन गया।
खाई है मैने दुनिया की ठोकर।
अब तो हमें नहीं खुद की फिकर।
ऐसा तो मैंने क्या गुना किया?
की लोगो ने मुझे जिंदा लाश बना दिया।
कभी नहीं बजती एक हाथ से ताली।
तो फिर दुनिया मुझे ही क्यों देती हैं गाली ?
कवियत्री : अवनी शिवांग दवे
(शिवे स्वरी), वडोदरा.

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